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दवा-अन्न मिलावटखोरों की खैर नहीं! मुंबई FDA के नए कमिश्नर बने बेबाक IAS तुकाराम मुंढे साहेब

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लोकविजन न्युज

गडचिरोली : साल में 24 ट्रांसफर: ‘महाराष्ट्र के सिंघम’ IAS तुकाराम मुंढे को मिली मुंबई FDA की कमान, जानिए इस जांबाज अफसर का इतिहास

​मुंबई:

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महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के बेहद चर्चित और सख्त IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को सरकार ने अब मुंबई में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) का कमिश्नर नियुक्त किया है। मई 2026 में हुई यह नियुक्ति इसलिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में दवा और अन्न में मिलावट के साथ-साथ इस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुंढे की सख्त छवि का इस्तेमाल करने के लिए सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।

​अपनी ईमानदारी और निडरता के कारण जनता के बीच ‘महाराष्ट्र के सिंघम’ के रूप में मशहूर तुकाराम मुंढे का सफर बेहद प्रेरणादायी और चुनौतियों से भरा रहा है।

​बीड के गरीब परिवार से निकलकर बने ‘सिंघम’

​मूल रूप से महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले तुकाराम मुंढे अपनी सख्त प्रशासनिक शैली, भ्रष्टाचार-विरोधी रुख, पारदर्शिता और बेजोड़ अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। लेकिन नियमों से कभी समझौता न करने की उन्हें एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी है—21 साल के करियर में अब तक उनका 24 बार ट्रांसफर हो चुका है। मंत्रालय के गलियारों में तो यहाँ तक मज़ाक चलता है कि “अगर कोई काम करवाना है तो मुंढे को पोस्ट करो, और अगर हटाना है तो कुछ महीने इंतज़ार करो।”

​क्यों होते हैं बार-बार ट्रांसफर?

​तुकाराम मुंढे का काम करने का तरीका पूरी तरह ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ पर आधारित है। राजनेताओं से सीधा टकराव, अवैध निर्माण और हॉकरों पर सख्त कार्रवाई, तथा ठेकेदारों द्वारा नियम तोड़ने पर तत्काल रोक लगाना उनके ट्रांसफर की मुख्य वजहें रही हैं। वे खुद कहते हैं, “मैं जनता के प्रति जवाबदेह हूँ।” यही कारण है कि वे राजनीतिक दबाव से हमेशा दूरी बनाकर रखते हैं। उन्हें अक्सर देश के एक और चर्चित अधिकारी ‘अशोक खेमका’ के समकक्ष देखा जाता है।

​करियर की प्रमुख उपलब्धियां और टाइमलाइन

​तुकाराम मुंढे ने जहाँ भी कदम रखा, वहाँ बड़े और ऐतिहासिक बदलाव किए। उनके करियर का सफरनामा कुछ इस प्रकार है:

​2005 (ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर, सोलापुर): प्रशासनिक करियर की शुरुआत।

​2007-08 (असिस्टेंट कलेक्टर, देगलूर, नांदेड़): यहाँ उन्होंने गंदे पानी की समस्या पर महज 7 दिन में नोटिस जारी किया। लैंड और सैंड (रेत) माफियाओं पर ऐसी कार्रवाई की कि उन्हें जान से मारने की धमकियां तक मिलीं। इसके बावजूद उन्होंने 4 महीने में 500 से अधिक अपीलों का निपटारा कर एक भी केस पेंडिंग नहीं छोड़ा। वकील भले ही नाराज़ हुए, लेकिन जनता बेहद खुश थी।

​2011 (जिला कलेक्टर, जालना): प्रशासनिक कमान संभाली।

​2014-16 (कलेक्टर, सोलापुर): इस कार्यकाल में उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ काम किए। पंढरपुर वारी के लिए महज 21 दिनों में 65 एकड़ ज़मीन पर 3000 टॉयलेट्स का निर्माण कराया। वहीं, चंद्रभागा नदी पर ₹10 करोड़ की लागत से सिर्फ 91 दिनों में घाट तैयार करवाया। इन बेहतरीन कार्यों के लिए उन्हें 2015-16 में ‘Best Collector’ के अवॉर्ड से नवाजा गया।

​मई 2016 (कमिश्नर, नवी मुंबई नगर निगम): तत्कालीन शिवसेना शासित एनएमएमसी (NMMC) में कड़ा रुख अपनाया।

​मार्च 2017 (CEO, PMPML, पुणे): पुणे की परिवहन सेवा में अनुशासन लाने के लिए कड़े कदम उठाए।

​फरवरी 2018 (कमिश्नर, नासिक नगर निगम): अवैध निर्माणों को ढहाया और हॉकरों पर बड़ी कार्रवाई की, जिसके चलते स्थानीय बीजेपी नेताओं से उनका सीधा टकराव हुआ।

​जनवरी 2020 (कमिश्नर, नागपुर नगर निगम): नागपुर में कमान संभाली।

​सितंबर 2022 (कमिश्नर हेल्थ सर्विसेज और डायरेक्टर NHM): स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के प्रयास किए।

​अगस्त 2025 (सचिव, दिव्यांग कल्याण विभाग): यहाँ रहते हुए उन्होंने फंड आवंटन में हो रही बड़ी गड़बड़ी को उजागर किया और सरकारी योजनाओं के सख्त क्रियान्वयन पर जोर दिया।

​मार्च 2026 (सचिव, आपदा प्रबंधन, राजस्व एवं वन विभाग): यहाँ उनका 24वां ट्रांसफर हुआ।

​मई 2026 (कमिश्नर, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, मुंबई): वर्तमान में इस महत्वपूर्ण पद पर सेवाएं दे रहे हैं।

​जनता में भारी लोकप्रियता

​नेताओं और भू-माफियाओं के लिए भले ही तुकाराम मुंढे एक सिरदर्द रहे हों, लेकिन सोलापुर, नासिक और नवी मुंबई जैसी जगहों पर उन्हें आम जनता का भरपूर और अभूतपूर्व समर्थन मिला। देगलूर में तो उन्होंने गंदे पानी की समस्या को महज 48 घंटों के भीतर सुधरवा दिया था।

​ईमानदार, निडर और नियमों से कभी समझौता न करने वाले इस ‘सिंघम’ अफसर की नई पोस्टिंग (मुंबई FDA) पर अब पूरे राज्य की नजरें टिकी हैं कि वे मिलावटखोरों और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ क्या नया एक्शन लेते हैं।

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